जयपुर । राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला लेते हुए गुर्जर समेत 5 जातियों को मिल रहे आरक्षण से अलग कर दिया है। बता दें कि इन लोगों को विशेष पिछड़ा वर्ग कानून के तहत 5 फीसदी आरक्षण मिलता है। इसके साथ ही कोर्ट ने पिछले साल 16 अक्तूबर को राज्य सरकार द्वारा जारी की गई अधिसूचना को बी रद्द कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद एक बार फिर गुर्जर समाज के लोग आंदोलन की तैयारी करने लगे हैं।
हाईकोर्ट में इस मामले से जुड़ी एक याचिका दाखिल की गई थी जिसमें कहा गया था कि संविधान के तहत आरक्षण 50 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकता। लेकिन राज्य सरकार की पिछले साल जारी अधिसूचना के चलते बने कानून से राज्य में आरक्षण की प्रतिशत निर्धारित सीमा से ज्यादा हो गया है। यह सीमा 49 फीसदी से बढ़कर अब 54 फीसदी हो गई है, जो असंवैधानिक है।
इस याचिका पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अधिसूचना को खारिज कर आरक्षण रद्द कर दिया है। इस फैसले के खिलाफ एक जुट हुए गुर्जर समाज और पूर्व आंदोलन के मुखिया किरोड़ी मल बैंसला ने इस मामले में कहा कि हम राज्य सरकार के खिलाफ फिर से लड़ाई शुरू करेंगे।
बता दें कि कोर्ट ने 2009 में में भी आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से ज्यादा होने के कारण ऐसे आरक्षण कानून पर रोक लगा चुका है। पूर्व में इस मुद्दे के चलते गरमाये गुर्जर आंदोलन में जमकर हिंसा हुई थी और लंबे समय तक रेल यातायात बाधिक हुआ था। उस दौरान आंदोलन के चलते 70 से ज्यादा लोगों की जान भी गई थी।
Saturday, 10 December 2016
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राजस्थान हाईकोर्ट ने गुर्जरों का 5 फीसदी आरक्षण रद्द किया, समाज ने दी एक बार फिर
आंदोलन की चेतावनी
राजस्थान हाईकोर्ट ने गुर्जरों का 5 फीसदी आरक्षण रद्द किया, समाज ने दी एक बार फिर आंदोलन की चेतावनी
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