कोच्चि. केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि हर लव मैरिज को लव जिहाद नहीं कहा जा सकता। हाईकोर्ट का ये कमेंट कन्नूर के रहने वाले श्रुति और अनीस हमीद की पिटीशन पर सुनवाई के दौरान आया। श्रुति ने HC से अपने पति के साथ रहने की इजाजत मांगी थी। कोर्ट ने अपने फैसले में श्रुति को पति अनीस के साथ रहने की इजाजत दे दी है।
क्यों हाईकोर्ट पहुंचा श्रुति-अनीस का केस
- अनीस पर आरोप लगाया गया था कि उसने श्रुति को अगवा कर लिया था और उसका जबरन धर्म परिवर्तन कराया। ये भी आरोप था कि अनीस ने श्रुति के साथ जबरदस्ती निकाह किया।
- HC ने कहा, "हर लव मैरिज को लव जिहाद नहीं कहा जा सकता है। इस तरह की शादियों (श्रुति-अनीस का मामला) को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि प्यार की कोई सीमा नहीं होती।"
केरल में लव जिहाद का कौन सा केस चर्चा में है?
- केरल हाईकोर्ट ने 25 मई को हिंदू लड़की हादिया (24) के केरल के मुस्लिम शफीन जहां से निकाह को रद्द करार दिया था और उसे उसके माता-पिता के पास रखने का आदेश दिया था। हादिया ने शफीन से दिसंबर 2016 में निकाह किया था। आरोप है कि निकाह से पहले महिला का धर्म परिवर्तन कराया गया था। शफीन ने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर कर केरल हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिए थे?
- जुलाई में सुनवाई के दौरान SC ने कहा था, "नेचुरल एजेंसी होने के नाते हम NIA को ये काम सौंपते हैं कि वो इस मामले की पूरी तस्वीर सामने लाए। वो ये भी पता करे कि ये केवल इकलौती घटना है, जो छोटे इलाके तक ही सीमित है या फिर इस मामले में कुछ बड़ा था।"
- इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ये भी एग्जामिन कर रहा है कि क्या हाईकोर्ट को रिट पिटीशन के आधार पर इस शादी को खारिज करने का अधिकार है भी या नहीं।
केरल सरकार का क्या स्टैंड है?
- केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था, "हिंदू महिला के मुस्लिम धर्म स्वीकार करने और मुस्लिम युवक से विवाह के मामले में NIA जांच की जरूरत नहीं है। इस मामले में पुलिस ने पूरी जांच की है और इसमें ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है, जिससे ये मामला NIA को सौंपा जाए।"
NIA ने इस मामले में क्या कहा?
- SC में NIA की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल मनिन्दर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी, "जांच एजेंसी का यह मानना है कि महिला का धर्म परिवर्तन करके मुस्लिम शख्स से निकाह कराना लव जिहाद से अलग घटना नहीं है। लव जिहाद के अन्य मामलों में भी यही लोग शामिल थे, जिन्होंने उन हिन्दू लड़कियों के धर्म बदलवाए जिनके अपने मां-बाप से मतभेद थे।"

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