अब एक ऐसी खबर जिस पर आप बिल्कुल भी भरोसा नहीं करेंगे. मध्यप्रदेश में सरकारी महकमों से भ्रष्टाचार का खात्मा हो गया है और अब सरकारी अफसरों या कर्मचारियों के पास कालधन नहीं है. राज्य की एंटी करप्शन एजेंसी लोकायुक्त संगठन के रुख से तो यही लगता है.
दरअसल, लोकायुक्त पुलिस ने बीते वर्ष 2016 में भोपाल, इंदौर और रीवा संभाग में एक भी छापे की कार्रवाई नहीं की और न ही इस वर्ष गुजरे अब तक के तीन महीने में एक भी भ्रष्ट सरकारी बाबू के ठिकानों पर छापेमारी की है. यही नहीं इन 15 महीनों में उज्जैन, सागर, जबलपुर और ग्वालियर संभाग में महज एक-एक छापे की कार्रवाई की गई.
शिवराज सिंह चौहान ने वर्ष 2013 में लगातार तीसरी बार जब मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी तो शपथ ग्रहण के बाद सबसे पहले सीएम शिवराज ने प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस के तहत कार्रवाई करने का ऐलान किया था. जो सीएम शिवराज की भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए दो टूक चेतावनी थी.
फलस्वरुप, राज्य की सबसे सशक्त एंटी करप्शन एजेंसी लोकायुक्त संगठन ने संसाधनों की कमी होते हुए भी भ्रष्ट अफसरों और कर्मचारियों के खिलाफ ताबड़तोड़ छापेमार कार्रवाई की और भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे सरकारी बाबूओं को संदेश देने की कोशिश की.
आंकड़े पर गौर करे तो लोकायुक्त पुलिस ने बीते वर्ष 2016 में राजधानी भोपाल संभाग, व्यावसायिक राजधानी इंदौर और रीवा संभाग में एक भी छापे की कार्रवाई नहीं की
-1 जनवरी 2016 से 28 फरवरी 2017 तक के आंकड़े
-भोपाल,इंदौर,रीवा संभाग एक भी छापे की कार्रवाई नहीं
-छापे की कुल 4 कार्रवाई यानि हर चार महीने में एक छापा
-उज्जैन,सागर,जबलपुर और ग्वालियर में 1-1 छापेमारी
-रिश्वत लेते 93 सरकारी बाबूओं को रंगे हाथों पकड़ा
-11 सरकारीकर्मियों पर पद के दुरुपयोग की कार्रवाई
मुख्यालय के अलावा लोकायुक्त संगठन का सात संभागों भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर, सागर और रीवा में दफ्तर हैं. आंकड़ों के मुताबिक सरकारी दफ्तरो में काम के बदले या फिर फाईल आगे बढ़ाने के लिए रिश्वतखोरी बढ़ी है.
इसी अवधि में लोकायुक्त पुलिस ने भोपाल संभाग में 18 घूसखोरों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। सागर संभाग में 12 रिश्वतखोर, इंदौर संभाग में 20, रीवा संभाग में 7 सरकारी बाबू रिश्वत लेते पकड़े गए, जबकि जबलपुर संभाग में 15, ग्वालियर संभाग में 9 और उज्जैन संभाग में 12 घूसखोर सरकारी अधिकारी और कर्मचारी लोकायुक्त पुलिस के हाथों रंगे हाथ गिरफ्तार किये गए.
-जनवरी 2016 से 28 फरवरी 2017 तक के आंकड़े
1- भोपाल संभाग में 18 घूसखोर रंगे हाथों पकड़े,छापेमारी शून्य
2- सागर संभाग में रिश्वत लेते 12 लोग गिरफ्तार
3- इंदौर संभाग में 20 ट्रेप की कार्रवाई, छापेमारी शून्य
4- रीवा संभाग में 7 ट्रेप, एक भी छापेमारी नहीं
5- जबलपुर संभाग में 15 ट्रेप, एक छापे की कार्रवाई
6- ग्वालियर संभाग में 9 ट्रेप , एक छापे की कार्रवाई
7- उज्जैन संभाग में 12 घूसखोर गिरफ्तार, छापेमारी जीरो
इस बारे में लोकायुक्त पुलिस के महानिदेशक अनिल कुमार का कहना है कि हाल के वर्षों में लोकायुक्त में भ्रष्टों के खिलाफ शिकायतों की तादाद बढ़ी है. लोकायुक्त संगठन मुख्यालय में लगभग रोजाना 500 शिकायतें आती हैं, जिस में रिश्वत मांगने के साथ ही पद का दुरुपयोग और घपले-घोटाले से जुड़ी होती है. शिकायतों के परीक्षण के बाद ही लोकायुक्त की ओर से आगे की कार्रवाई की जाती है.

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