नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में जगह-जगह खुल चुके प्राइवेट कोचिंग सेंटरों पर चिंता जाहिर की है। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह मेडिकल और इंजिनियरिंग की तैयारी कराने वाले इन प्राइवेट संस्थानों को रेग्युलेट करने के लिए गाइडलाइंस बनाए।
कोर्ट ने कहा कि शिक्षा का व्यवसायीकरण होने से रोकने के लिए ऐसा करना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मेडिकल और इंजिनियरिंग कोर्सों में दाखिले सिर्फ एंट्रेंस टेस्ट के आधार पर नहीं होने चाहिए। इनमें बारहवीं के रिजल्ट को भी महत्व दिया जाना चाहिए। एंट्रेंस टेस्ट को 60 फीसदी और बारहवीं के रिजल्ट को 40 फीसदी वेटेज दिया जा सकता है। जस्टिस ए.के. गोयल और जस्टिस यू.यू. ललित की बेंच ने कहा कि यह नीतिगत मामला है। ऐसे नियम अदालत नहीं बना सकती, इसलिए सरकार को इस पर सख्त नीति बनानी चाहिए। सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि सरकार जल्दी ही नैशनल लेवल पर एंट्रेंस टेस्ट कराने के लिए एक एजेंसी का गठन करने जा रही है। इसमें कोर्ट के सुझावों का भी ध्यान रखा जाएगा।
बता दें कि पिछले साल 9 मार्च को एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि रिहायशी इलाकों में कोचिंग इंस्टिट्यूट नहीं होने चाहिए क्योंकि इससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानी होती है।
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