Film Review: जानिए कैसी है ऋतिक रोशन की फिल्म “काबिल” - JBP AWAAZ

Breaking

Wednesday, 25 January 2017

Film Review: जानिए कैसी है ऋतिक रोशन की फिल्म “काबिल”

मुंबई: राकेश रोशन बदले की कहानियां फिल्मों में लाते रहे हैं। ‘खून भरी मांग’ और ‘करण-अर्जुन’ में उन्होंने इस फॉर्मूले को सफलता से अपनाया था। उनकी फिल्मों में विलेन और हीरो की टक्कर और अंत में हीरो की जीत सुनिश्वित होती है। हिंदी फिल्मों के दर्शकों का बड़ा समूह ऐसी फिल्में खूब पसंद करता है, जिसमें हीरो अपने साथ हुए अन्याय का बदला ले। चूंकि भारतीय समाज में पुलिस और प्रशासन की पंगुता स्पष्ट है, इसलिए असंभव होते हुए भी पर्दे पर हीरो की जीत अच्छी लगती है। राकेश रोशन की नयी फिल्म ‘काबिल’ इसी परंपरा की फॉर्मूला फिल्म है, जिसका निर्देशन संजय गुप्ता ने किया है। फिल्म में रितिक रोशन हीरो की भूमिका में हैं।
ऋतिक रोशन को हम ने हर किस्म की भूमिका में देखा और पसंद किया है। उनकी कुछ फिल्में असफल रहीं, लेकिन उन फिल्मों में भी रितिक रोशन के प्रयास और प्रयोग को सराहना मिली। 21वीं सदी के आरंभ में आए इस अभिनेता ने अपनी विविधता से दर्शकों और प्रशंसकों को खुश और संतुष्ट किया है। रितिक रोशन को ‘काबिल’ लोकप्रियता के नए स्तर पर ले जाएगी।
फिल्म की कहानी 
ये कहानी है डबिंग आर्टिस्ट रोहन भटनागर (रितिक रोशन) की , जिसकी जिंदगी दिन में डबिंग स्टूडियो और रात को घर पर गुजरती है. रोहन की एक ही तमन्ना है कि उसको एक ऐसा हमसफ़र मिले जिसके साथ वो अपनी सारी जिंदगी गुजार सके. तभी रोहन की जिंदगी में सुप्रिया (यामी गौतम) की एंट्री होती है और रोहन के व्यक्तित्व को देखकर सुप्रिया काफी इंप्रेस होती है और दोनों शादी कर लेते हैं। दोनों दिव्यांग होते हुए भी एक दूसरे के प्यार में खोये रहते हैं तभी अचानक एक दिन ऐसा आता है जब कॉर्पोरेटर माधवराव शेल्लार (रोनित रॉय) और अमित शेल्लार (रोहित रॉय ) की वजह से रोहन की जिंदगी से सुप्रिया हमेशा के लिए चली जाती है. इसका बदला लेने के लिए रोहन प्लान बनाता है और अंततः सच की जीत होती है।
फिल्म में अदाकारी
ऋतिक रोशन की बेहतरीन अदाकारी एक बार फिर से देखने को मिली है जो आपको इमोशनल करने के साथ सोचने पर भी विवश करती है। यामी गौतम और ऋतिक ने दिव्यांग किरदार बखूबी निभाया है. रोनित रॉय और उनकी डायलॉग डिलीवरी भी कमाल की है. नरेंद्र झा और सुरेश मेनन का काम भी सहज है। हालांकि फिल्म की कहानी के बारे में तो ट्रेलर से पता चल ही गया था, बावजूद इसके फिल्म देखते वक्त बोरियत नहीं होती. यही फिल्म का यूएसपी है। फिल्म के गानों की खासियत हे कि वो कहानी को आगे लेकर जाते हैं। फिल्म की सिनोमैटोग्राफी और बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है जो कि संजय गुप्ता की फिल्मों की खासियत भी है।
फिल्म में दिव्यांग के हिसाब से रिसर्च वर्क ठीक है, जैसे पैसों की समझ, सुनने की परख, खाना पकाना इत्यादि. साथ ही दिव्यांग इंसान की बदला लेने की प्लानिंग दिलचस्पी बनाए रखती है।
बॉक्स ऑफिस
फिल्म लगभग 2350 स्क्रीन्स पर रिलीज हुई है. वैसे मार्केटिंग और प्रोमोशन का खर्च मिलाकर फिल्म का बजट लगभग 50 करोड़ बताया जा रहा है जिसमें रितिक रोशन की फीस शामिल नहीं है. खबरों के मुताबिक, फिल्म के म्यूजिक (8 करोड़), डिजिटल और सैटेलाईट राइट्स (50 करोड़ ) पहले से ही बिक चुके हैं। वहीं ओवरसीज (16 करोड़) और डिस्ट्रिब्यूशन (42 करोड़) बताया जा रहा. फिल्म की रिकवरी कॉस्ट 80 करोड़ है. अगर फिल्म 85 करोड़ कमाती है तो हिट और 120 करोड़ कमाते ही सुपर हिट कहलाएगी. वैसे 5 दिन का वीकेंड है और बेहतरीन ओपनिंग के चांसेस हैं।

No comments:

Post a Comment

Whatsapp status