कैश की किल्लत के बीच पहले चेन्नई फिर दिल्ली और अब जयपुर से पकड़ी गई करोड़ों रुपये के नए नोटों की खेप के बीच अहम सवाल खड़ा हो गया है कि क्या प्रधानमंत्री मोदी की नोटबंदी जैसी महत्वाकांक्षी योजना को बैंक और अन्य सरकारी कर्मचारी पलीता लगाने में जुटे हुए हैं?
सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है कि जब आम आदमी घंटों लाइन में लगकर बामशक्कत मात्र दो ढाई हजार रुपये का इंतजाम कर पा रहा है तब चंद लोगों के पास नए नोटों के बंडल कहां से पहुंच रहे हैं? आयकर विभाग और पुलिस के छापे में रोज रोज पकड़ी जा रही नए नोटों की करोड़ों की खेप आखिर आ कहां से रही है? निश्चित रूप से यह सवाल आम आदमी के साथ ही सरकार को भी परेशान कर रहा होगा।
सवाल इसलिए भी है कि नोटबंदी के बाद फुलप्रूफ व्यवस्था का दावा कर रही सरकार का मैनेजमेंट आखिर कहां फेल हो रहा है। कैसे कालेधन के ठेकेदार सरकार की नाक के नीचे अपनी ब्लैक मनी को व्हाइट कर रहे हैं उस कालेधन को जिसकी रोकथाम का दावा सरकार लगातार कर रही है और जिसकी रोकथाम के लिए रोज नियम बदले जा रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल तो ये है कि क्या बैंक और सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत के बगैर ये काम संभव है? कुछ दिन पहले ही दिल्ली के एक्सिस बैंक के दो मैनेजरों को पुलिस ने करोड़ों के कालेधन को सफेद करने के आरोप में पकड़ा था, जो पुराने नोटों को बदलकर आम आदमी के हिस्से के नए नोटों को कुछ रसूखदारों तक पहुंचा रहे थे।
इस काम के बदले में वो सोने की ईंटें लिया करते थे। अब ऐसे में महत्वपूर्ण सवाल ये खड़ा हो गया है कि क्या व्यवस्था में हो चुके इस बड़े छेद के बीच प्रधानमंत्री मोदी की इस महत्वाकांक्षी योजना का सफल होना संभव है? आखिर इन सवालों के जवाब कौन देगा?
यहां पकड़ी गई नए नोटों की बड़ी खेप
चेन्नई में मनी एक्सचेंजर के यहां आयकर विभाग के छापे में 90 करोड़ और तीस किलो सोना बरामद, दस करोड़ के नए नोट भी मिले
बंगलुरू में आयकर विभाग ने दो इंजीनियरों के यहां से छह करोड़ की नकदी बरामद की, इनमें से 4.7 करोड़ की नई नकदी
दिल्ली में ला फर्म के दफ्तरों में छापे में मिले 13.56 करोड़ नकद, दो करोड़ के नए नोट भी बरामद
जयपुर में सोमवार को आयकर विभाग ने अरबन कोपरेटिव बैंक से 156 करोड़ की नकदी बरामद की, 132 करोड़ के नए नोट मिले
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