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Thursday, 27 April 2017

जेल से बाहर आई साध्वी प्रज्ञा, एटीएस पर लगाया प्रताड़ना का आरोप

मुंबई। भगवा चोला, माथे पर लाल तिलक और गले में रूद्राक्ष की माला। ये वो रूप है जो किसी भी साधु का होता ये। साधु वो व्यक्ति होता जिस पर शायद ही कोई शख्स उंगली उठा सकें लेकिन इस चोले वाली साध्वी प्रज्ञा पर सवाल उठे और हालात इतने खराब हो गए कि उन्हें जेल की सलाखों में कैद होना पड़ा। अब साध्वी प्रज्ञा जेल की सलाखों से बाहर आ गई है और अपना गुस्सा जाहिर करते हुए इसे साजिश करार दिया।
एटीएस पर लगाया प्रताड़ना का आरोप
जेल से बाहर आने के बाद संवाददाताओं से बातचीत के कहा, ‘एटीएस ने मुझे इस तरह प्रताड़ित किया कि शायद ही भारत में कभी किसी महिला शरीर को इस तरह प्रताड़ना दी गई होगी। एटीएस की टीम पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए ही साध्वी ने कहा कि उन्हें गैर कानूनी तरीके से बंधक बनाया गया था।
कांग्रेस को घेरा
सवांददाताओं से बातचीत के दौरान कांग्रेस पर प्रहार करते हुए साध्वी ने कहा कि मालेगांव ब्लास्ट केस में उनके जेल के लिए कांग्रेस ने साजिश रची थी। भगवा को आतंक का रूप देने का काम कांग्रेस ने किया है।
शर्त पर मिली जमानत
प्रज्ञा को ये जमानत 5 लाख के निजी मुचलके पर सशर्त दी गई है। साथ ही कोर्ट ने उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करने के साथ-साथ सभी गवाहों को प्रभावित नहीं करने का निर्देश दिया है। वहीं कर्नल प्रसाद पुरोहित की याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
जानिए एनआईए ने आरोप पत्र में क्या कहा?
-एनआईए का दावा है कि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ मुकदमा चलाने लायक सबूत नहीं है। इसकी वजह से मामले पर मकोका नहीं बनता है हालांकि ट्रायल कोर्ट ने अभी तक मकोका को हटाने पर कोई फैसला नहीं दिया है।
-इसके साथ ही एनआईए का कहना है कि जिस बाइक के बिना पर साध्वी वो आरोपी बनाया गया है वो साध्वी के नाम पर थी लेकिन धमाके के बहुत पहले से साध्वी के नाम पर चढ़ी बाईक को फरार आरोपी राम जी कालसांगरा इस्तेमाल कर रहा था।
-इसके साथ ही एनआईए ने दावा किया है कि साध्वी के खिलाफ मुकदमा चलाने लायक सबूत नहीं है इसकी वजह से उस पर मकोका कानून नहीं बनता है।
-साध्वी पर मकोका नहीं बनता है इसलिए उनका पहले वाला इकबालिया बयान अदालत में सबूत के तौर पर नहीं माना जाएगा।
-वहीं कर्नल प्रसाद पुरोहित के बारे में एनआईए की राय अलग है।
-साल 2016 मई में अपनी चार्जशीट में कर्नल प्रसाद पुरोहित के बारे में एनआईए का कहना है कि वो धमाकों की साजिश रचने में मुख्य आरोपी है।
-उनका कहना है कि कर्नल ने ही साल 2006 में अभिनव भारत संगठन की स्थापना की। संगठन के नाम पर पैसा जमा किया और उसी से हथियार और बारुद खरीदा।
-साल 2008 के अप्रैल महीने में भोपाल में मालेगांव धमाके की साजिश रची थी।
मालेगांव ब्लास्ट की कहानी
बता दें कि मालेगांव ब्लास्ट 29 सितंबर 2008 में हुए थे। जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई थी तो वहीं 79 लोग गंभीर रुप घायल हो गए थे। इस मामले में एनआईए ने याचिका दायर की थी जिसमें 14 लोगों को आरोपी बनाया था। साथ ही आरडीएक्स देने और साजिश रचने के आरोप में साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित को गिरफ्तार किया गया था।

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