मध्यप्रदेश सरकार गरीबों को बांटे जाने वाले सस्ता राशन स्वेच्छा से छोड़ने के लिए अभियान चलाने जा रही है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिल रहे एक रुपए किलो गेहूं, चावल, नमक और रियायती दरों पर मिलने वाला कैरोसिन और शक्कर लेना छोड़ने वाले पात्रता प्राप्त परिवारों का राज्य सरकार जिले और विकासखंड स्तर पर सम्मान करेगी।
ये योजना एक मई से 30 मई के बीच लागू की जाएगी। दरअसल, अन्नपूर्णा के योजना में हितग्राहियों बढ़ती संख्या ने प्रदेश सरकार के माथे पर बल ला दिए है। जनता नाराज भी न हों और अपात्र लोग बेदखल हो जाय इसके लिए सरकार ये योजना चलाएगी। राशन दुकानों की जांच से पता चला है कि 118 लाख परिवारों में से 14 लाख परिवार ऐसे हैं, जिनके या तो आधार नंबर गलत हैं या उन नंबरों पर जो नाम लिखे हैं, उनकी जगह कोई और निकल रहा है।
इस गड़बड़ी के सामने आने के बाद खाद्य विभाग कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। केंद्रीय खाद्य मंत्रालय ने राज्यों को संकेत दिए हैं कि अब सब्सिडी सिर्फ अंत्योदय परिवारों को मिलेंगी। ऐसे में प्रदेश सरकार अब इस दर पर अनाज पाने वाले लोगो की संख्या कम करने में जुट गई है।
ये योजना एक मई से 30 मई के बीच लागू की जाएगी। दरअसल, अन्नपूर्णा के योजना में हितग्राहियों बढ़ती संख्या ने प्रदेश सरकार के माथे पर बल ला दिए है। जनता नाराज भी न हों और अपात्र लोग बेदखल हो जाय इसके लिए सरकार ये योजना चलाएगी। राशन दुकानों की जांच से पता चला है कि 118 लाख परिवारों में से 14 लाख परिवार ऐसे हैं, जिनके या तो आधार नंबर गलत हैं या उन नंबरों पर जो नाम लिखे हैं, उनकी जगह कोई और निकल रहा है।
इस गड़बड़ी के सामने आने के बाद खाद्य विभाग कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। केंद्रीय खाद्य मंत्रालय ने राज्यों को संकेत दिए हैं कि अब सब्सिडी सिर्फ अंत्योदय परिवारों को मिलेंगी। ऐसे में प्रदेश सरकार अब इस दर पर अनाज पाने वाले लोगो की संख्या कम करने में जुट गई है।

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