शायद ही दुनिया में कोई ऐसी जगह हो, जहां अपराध ना होते हैं. हमारे आसपास हर जगह कहीं ना कहीं छोटे-बड़े अपराध होते ही रहते हैं. आज के दौर में अपराध पर पूरी तरह अंकुश लगाना नामुमकिन हैं, लेकिन मध्य प्रदेश में एक ऐसी भी जगह है जहां कोई अपराध नहीं होता.
मध्य प्रदेश के बैतूल में केवलाझिर नाम का एक ऐसा ही अनोखा गांव भी है, जिसे पुलिस ने 100 फीसदी अपराध मुक्त गांव घोषित किया है. आज से पांच साल पहले इस गांव में एक ऐसी घटना घटी थी, जिसने गांववालों की सोच को एकदम बदल कर रख दिया. 26 जनवरी 2011 को घटी एक वारदात ने इस गांव के लोगों की मानसिकता ही बदलकर रख दी.
ग्रामीणों ने शपथ ली कि वे दोबारा उनके गांव में ऐसा कोई अपराध नहीं होने देंगे, जिसमें पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़े.
इसके लिए ग्रामीणों ने संगठित होकर एक ऐसा सिस्टम लागू किया, जिसके तहत गांव में होने वाले सभी छोटे-बड़े विवादों को गांववाले आपस में ही बातचीत के जरिये या फिर पंचायत की मदद से सुलझा लेते हैं और ये विवाद बड़े अपराधों की शक्ल नहीं लेते. अपराध मुक्त गांव होने के चलते पुलिस, प्रशासन और जनप्रतिनिधि केवलाझिर गांव को पूरे जिले और प्रदेश के सामने एक मिसाल बनाना चाहते हैं.
केवलाझिर गांव में कोई त्योहार हो या फिर कोई दूसरा धार्मिक-सामाजिक आयोजन सभी को पंचायत द्वारा तय किए गए नियमों का पालन करना पड़ता है. जो कोई भी नियम तोड़ता है यानि विवाद की वजह बनता है उसे पहले समझाया जाता है, यदि वह नहीं मानता तो पंचायत के नियमों के मुताबिक सजा दी जाती है.
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दरअसल, 26 जनवरी साल 2011 के दिन बैतूल में शाहपुर थानाक्षेत्र के केवलाझिर गांव में हुई एक वारदात ने सीधे-सादे ग्रामीणों को हिलाकर रख दिया था. गांव में मामूली से विवाद के चलते छह लोगों ने मिलकर रामकिशोर नाम के एक शख्स की हत्या कर दी. इस घटना ने एक ही बार में कई गांवों को तबाह करके रख दिया था.
इस घटना से ग्रामीणों ने सबक लिया और दोबारा कभी ऐसा ना हो इसके लिए संगठित होकर गांव को अपराध मुक्त बनाने की योजना बनाई गई. हर नागरिक के लिए कड़े नियम बनाए गए. ये तय किया गया कि गांव में होने वाले किसी भी तरह के छोटे-बड़े विवादों को आपस में सुलझाया जाए, जिससे वो बड़े अपराध की शक्ल अख्तियार ना करें.
योजना पर काम शुरू हुआ तो गांव के सभी लोगों ने समर्थन देकर गांव को अपराधमुक्त बनाने के लिए तमाम संभव प्रयास किए, जिसका नतीजा ये हुआ कि 2011 के बाद आज तक इस गांव से एक भी शिकायत शाहपुर या किसी दूसरे थाने तक नहीं पहुंची.
केवलाझिर के एक ग्रामीण कल्लू सिंह धुर्वे का कहना है कि इस गांव में केवल पंचायत के तय नियमों का ही पालन किया जाता है. फिर भी कोई नियम तोड़ता है, यानि किसी विवाद की वजह बनता है तो पहले उसे समझाया जाता है. इससे बात नहीं बनती तो जुर्माना लगाया जाता है. अगर तब भी आरोपी नहीं सुधरा तो उसे सामाजिक बहिष्कार की चेतावनी दी जाती है और ना मानने पर बहिष्कार कर दिया जाता है.
गांव के सरपंच राजेंद्र कवड़े का कहना है कि हालांकि, 2011 के बाद से अब तक ऐसी कोई नौबत नहीं आई है. केवलाझिर गांव को शाहपुर थाना पुलिस ने अपराध मुक्त गांव घोषित कर ग्रामीणों को सम्मानित किया है. पुलिस के मुताबिक, केवलाझिर जैसे गांव एक रिसर्च का विषय हैं. इस तरह से यदि हर गांव खुद को क्राइम फ्री बनाने की दिशा में प्रयास करे तो ये सीधे तौर पर कानून के लिए बड़ी मदद होगी.
वहीं, घोड़ाडोंगरी के बीजेपी विधायक मंगल सिंह ने भी इस उपलब्धि पर गांव को 25 हजार का ईनाम देने की घोषणा की है. शाहपुर अनुविभाग के एसडीओपी निहित उपाध्याय का कहना है कि मध्यप्रदेश के थानों में पुलिस बल की कमी एक बड़ी समस्या है. वहीं, न्यायालयों में लंबित अपराधों में से कई ऐसे अपराध होते हैं, जिनमें दोनों पक्ष आपसी समझ से सुलझा सकते हैं.
केवलाझिर गांव के बाशिंदों ने कमाल की सूझबूझ दिखाते हुए पुलिस और न्यायालय की मदद की है, क्योंकि जब छोटे बड़े सुलझने लायक अपराधों की सूचना थानों तक पहुंचेगी ही नहीं तो पुलिस और कोर्ट दोनों का समय बचेगा.

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