दुनिया में जितने भी लोग हैं वह सुखी और प्रसन्न हो सकते हैं अगर वह पांच बातों का ध्यान रखें क्योंकि जब भी किसी को दुख और कष्ट का सामना करना पड़ता है तब उसकी वजह सिर्फ यही पांच चीजें होती है। अगर इन पांच चीजों से खुद को बचा कर रखें तो आपको कभी दुख नहीं भोगना पड़ेगा।
1.शंकराचार्य से लेकर चाणक्य तक कई विद्वानों ने कहा है कि अपेक्षा दुःखस्य कारणम्। यानी किसी से अपेक्षा यानी अनावश्यक उम्मीद पाल लेना दुख देता है। कारण यह है कि जब किसी से हम उम्मीद बना लेते हैं और वह हमारी उम्मीदों को पूरा नहीं कर पाता है तो मन में टीस सी उठती है और कष्ट होता है, आप निराश और दुखी महसूस करते हैं। इसलिए कहा जाता है कि किसी से उम्मीद पाल कर न रहें।
2.मोह को दुख का दूसरा बड़ा कारण माना गया है। जब व्यक्ति किसी से बहुत अधिक मोह करने लगता है तो अंत में दुख ही होता है। जैसे आपके घर में आपको कोई व्यक्ति या कोई चीज बहुत पसंद हो और वह आपसे दूर हो जाए तो आपको अंदर से तकलीफ और दर्द सी महसूस होती है और कई बार तो मोह के कारण आंखों से दर्द भी छलकने लगते हैं।
3.लोभ को भी दुख का कारण माना गया है। जब आपके मन में किसी चीज के प्रति लोभ पनपता है तो यह आपको अंततः दुखी ही कर जाता है। कारण यह है कि लोभ में मनुष्य अच्छे बुरे की समझ खो देते हैं और बाद में इसकी वजह से दुखी होते हैं।
4.सुख भी दुख का कारण होता है। जब व्यक्ति सुख में डूबने लगता है तो उसका शरीर अंदर से कमजोर होने लगता है और कई तरह के रोग आकर कष्ट देते हैं। सुख डूबे व्यक्ति को हमेशा दुख का भय बना रहता है जो उसे ऊपरी तौर पर तो सुखी रखता है लेकिन वह अंदर से दुखी रहता है इसलिए सुख कभी डूबना नहीं चाहिए।
5.पापं दुखस्य कारणम् यानी पाप कर्म दुख के कारण हैं। वेदव्यास जी ने संक्षेप में बताया है कि दूसरों को कष्ट पहुंचाना ही सबसे बड़ा पाप है। यानी जब आप किसी के मन को किसी तरह से कष्ट पहुंचाते हैं तो यह पाप होता है जो आपको दुख देता है। इसलिए कोई भी ऐसा काम न करें जिससे किसी के मन को चोट पहुंचे।
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