नई दिल्ली- नोटबंदी का आर्थिक विकास पर असर, वित्तीय घाटे, नौकरियों और टैक्स पर पड़ने वाला असर वित्तमंत्री अरुण जेटली के 2017 के बजट भाषण पर साफ देखने को मिलेगा। माना जा रहा है कि एक फरवरी को आने वाले बजट में सरकार के सामने इंडस्ट्री और आम आदमी दोनों की उम्मीद पर खरा उतरना सबसे बड़ी चुनौती है।
बजट सामने है और ये कुछ बड़ा करने का अच्छा मौका होगा। जिन रिफॉर्म की बातें हो रही है क्या उसकी झलक हमें इस बजट में देखने को मिलेगी।
नोटंबदी
पुराने नोटों के अचानक बंद किए जाने के खिलाफ लोगों के विरोध के बीच, सरकार ने एक व्यापक रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है। माना जा रहा है कि बजट में सरकार नकदी के लेन-देन को हतोत्साहित करने की आखिरी कोशिश करेगी। जेटली कार्ड और डिजिटल साधनों के माध्यम से लेन-देन को प्रोत्साहित करने के लिए टैक्स छूट और प्रोत्साहन की घोषणा कर सकते हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त मंत्री एक तय सीमा से अधिक नोटों को बैंकों से निकालने पर टैक्स लगाने जैसे उपाय कर सकते हैं।
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी)
नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को अप्रैल में लागू किया जाना था, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। अब उम्मीद है कि वित्तमंत्री व्यापक रूप से आगामी बजट 2017-18 में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के कार्यान्वयन की घोषणा कर सकते हैं। यह भारत की सबसे महत्वाकांक्षी कर सुधारों में से एक है, जिसके बाद पूरे देश में वस्तुओं का दाम एक हो जाएगा।
आयकर
जीएसटी के बाद, इस साल के बजट में प्रत्यक्ष कर सुधारों पर ध्यान दिया जा सकता है। आयकर स्लैब और दरों में बड़े बदलावों की घोषणा किए जाने की उम्मीद है। वित्त मंत्री अरुण जेटली धारा 80 सी योजना के तहत फिक्स्ड डिपॉजिट, बीमा प्रीमियम और म्युचुअल फंड में एक वर्ष के 1,50,000 रुपए की सीमा को बढ़ा कर दो लाख कर सकते हैं। इससे लोगों को नकदी के संग्रहण के बजाय अपने अतिरिक्त पैसे को वित्तीय प्रणाली में स्थानांतरित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकेगा।
अमीरों पर अधिक टैक्स, मिडिल क्लास को राहत की उम्मीद
वर्तमान में मिडिल क्लास को 2.5 लाख रुपए तक की आय पर टैक्स नहीं देना होता है। 2.5- 5 लाख रुपए तक दस फीसदी , 5-10 लाख की आय पर 20 फीसदी टैक्स और 10 लाख से अधिक की आय पर 30 फीसदी टैक्स लगता है। माना जा रहा है कि जेटली इसकी सीमा को कुछ बढ़ा सकते हैं। वहीं, अमीरों पर लगने वाले टैक्स की दर को बढ़ाए जाने की उम्मीद की जा रही है।
रेलवे
सरकार ने इस साल 2017 से रेल बजट को आम बजट के साथ पेश करने की योजना को हरी झंडी दे दी है। राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष में 1.20 लाख करोड़ रुपए सुरक्षा निधि को जमा करने के लिए यात्रियों पर एक विशेष उपकर लगाया जा सकता है।
कृषि
उम्मीद है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली बजट 2017 में नोटबंदी के कारण किसानों को हुए दर्द को कम करने की कोशिश करेंगे। आरोप है कि बुआई के सीजन के बीच में 8 नवंबर को घोषित की गई नोटबंदी के कारण किसान बीज नहीं खरीद पाए थे। मगर, आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले साल की तुलना में 2016 में बुवाई अधिक हुई थी। सरकार ने पहले ही खरीफ और रबी फसलों के लिए मौजूदा कृषि ऋणों पर 60 दिनों के लिए ब्याज को माफ किया है।
स्टार्ट-अप
बजट 2017 स्टार्ट-अप सेक्टर के लिए कुछ अच्छी खबर ला सकता है। वित्त मंत्री अरुण जेटली देश के स्टार्ट-अप को सशक्त करने के लिए तीन साल के टैक्स फ्री दौर को बढ़ाकर पांच साल कर सकते हैं। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय राजधानी में ‘स्टार्ट-अप इंडिया’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया था

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