पहले नोटबंदी का लाभ उठाने के लिए आलू का भारी स्टॉक किया, अब दाम गिरने पर सरकार के विरोध में नारेबाजी...ये कैसी राजनीति - JBP AWAAZ

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Friday, 16 December 2016

पहले नोटबंदी का लाभ उठाने के लिए आलू का भारी स्टॉक किया, अब दाम गिरने पर सरकार के विरोध में नारेबाजी...ये कैसी राजनीति

इंदौर । नोटबंदी को लेकर सियासी दल किस तरह अपनी राजनीति चमकाने में लगे हैं इसका एक नमूना शुक्रवार सुबह देखने को मिला। इंदौर में कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने कुछ लोगों के साथ मिलकर डीएम आफिस के बाहर और राजबाड़ा इलाके की सड़कों पर आलू फेंककर प्रदर्शन किया। इनका आरोप है कि नोटबंदी के चलते किसानों का आलू- 3-4 रुपये किलो पर बिक रहा है। इससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। जबकि जांच में सामने आया है कि कुछ लोगों ने नोटबंदी का लाभ उठाने के लिए इस नीयत से भारी मात्रा में आलू को स्टॉक कर लिया था कि आगे ये महंगा होगा। अब दांव पलट जाने पर इन लोगों के साथ विधायक जी सड़कों पर उतर आए।

भाजपा को ठहराया जिम्मेदार

मोदी सरकार की नोटबंदी को गलत ठहराते हुए कांग्रेस विधायक अपने समर्थकों समेत कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां उन्होंने ट्राली में लाई आलू की बोरियों को सड़कों पर खाली करना शुरू कर दिया। पटवारी का कहना है कि मोदी सरकार की नोटबंदी का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है। किसानों की हालत बदतर हो रही है। किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य तक नहीं मिल रहा है। घरों में आलू सड़ रहा है। उनके पास इतनी जगह भी नहीं कि उसे सुरक्षित कहीं रख सकें। ऐसे में किसानों के पास आत्महत्या करने का ही एक विकल्प बचा है।

हिरासत में लिए गए विधायक ने शुरू किया अनशन

इस हंगामे के चलते विधायक पटवारी समेत उनके 50 समर्थकों को हिरासत में लिया गया। लेकिन थाने पहुंचने पर उन्होंने अनशन शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि मोदी सरकार किसानों को राहत पहुंचाने के लिए राहत भरी घोषणा करें। बहरहाल सभी को मूसाखेड़ी जेल में रखा गया है।

नोटबंदी में मुनाफा कमाने की चाहत भारी पड़ी

वहीं जानकारों का कहना है कि इलाके में कुछ लोगों ने नोटबंदी के बाद आलू के महंगे होने की आशंका के चलते बड़ी मात्रा में इसका स्टॉक कर लिया था। इनकी चाहत तो बाद में महंगे दाम पर आलू बेचने की थी लेकिन अब उनका दांव उल्टा पड़ गया है। अब उनके पास इतना आलू हो गया है कि उसे रखने की कीमत ज्यादा आ रही है इसलिए सड़कों पर पटक कर झूठा विरोध दर्ज करा रहे हैं। हालांकि नोटबंदी से किसानों को नुकसान तो हुआ है लेकिन ऐसे लोगों को नहीं जो मुनाफाखोरी की आश लिए बैठे थे।

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