यहां मरने के बाद भी नही करते अंतिम संस्कार, शवों को घरों में रखकर करते हैं ये काम… - JBP AWAAZ

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Wednesday, 21 December 2016

यहां मरने के बाद भी नही करते अंतिम संस्कार, शवों को घरों में रखकर करते हैं ये काम…



यूं तो सदियों पुरानी मान्यता है कि जब किसी की मृत्यु हो जाती है तो उनका अंतिम संस्कार कर उन्हें हमेशा के लिए अलविदा कह दिया जाता है। अगर आप से कहा जाए कि मृत शरीर को अपने साथ अपने घर में ही रखिए, तो आप शायद आग-बबूला हो जाएंगे और सोचकर ही डर भी महसूस करेंगे। हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि आप उनसे प्यार नहीं करते, बल्कि ऐसा करना हमारे समाज की रितियों के खिलाफ जाना होता है।


आज हम आपको इंडोनेशिया के एक ऐसे आश्चर्यचकित करने वाले समाज से रूबरू कराने जा रहें हैं, जहाँ के लोग अपने परिवार वालों से इतना प्यार करतें हैं कि उनकी मौत के बाद भी उन्हें खुद से अलग नहीं कर पातें हैं। जी हां, ये कोई फ़िल्मी कहानी नहीं बल्कि एकदम सच बात है।

इंडोनेशिया के दक्षिण सुलावेसी के पहाड़ों पर रहने वाले ‘तोरजा’ समुदाय के लोग अपने परिवार के किसी सदस्य की मौत के बाद उसके मृत शरीर को दफ़नाने के बजाय उनके साथ कुछ ऐसा हैरतअंगेज काम करते हैं जिसे हम और आप शायद कभी करने की सोच भी नहीं सकतें हैं। किसी भी देश, गांव और समाज में मृत्यु होने के बाद जल्द से जल्द शव का अंतिम संस्कार कर दिया जाता है, लेकिन ‘तोरजा‘ समाज के लोग मृत्यु के बाद भी मृत शरीर को शव नहीं मानते, बल्कि उनका मानना है कि उनके अपनों का शव परिवार का ही एक हिस्सा है।

इतना ही नही इस समाज में शव को घर में ठीक उसी प्रकार से रखा जाता है जैसे वो जीवित अवस्था में रहता था। ये लोग मृतक को बीमार व्यक्ति की तरह मानते हैं, और इस स्थिति को ‘मकुला‘ कहा जाता है। आपको जानकार शायद हैरानी होगी कि यहाँ लोग शव को न केवल अपने पास रखते हैं बल्कि प्रतिदिन शव को नहलाते हैं, खाना खिलाते हैं, और एक बीमार सदस्य की तरह उनका ध्यान भी रखते हैं।

मृतकों के शरीर को सुरक्षित रखने के लिए ये लोग फॉर्मल्डिहाइड (Formaldehyde) और पानी का मिश्रण नियमित रूप से शरीर पर लगाते रहते हैं। यह लोग अपने परिवार से कितना प्यार करतें हैं इस बात का अंदाज़ा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि इनका कहना है कि, “इन्हें शवों से डर नहीं लगता क्योंकि मृतक के प्रति प्यार, डर से ज्यादा होता है।”

इस समुदाय के लोगों का कहना है कि इस तरह शव को अपने पास रखना इनकी संस्कृति है और उन्हें बिलकुल भी अजीब नहीं लगता। इन लोगों की मान्यता है कि इंसान के अंतिम संस्कार में पूरा कुनबा उपस्थित रहना चाहिए, इसलिए जब तक परिवार के सभी लोग शव के पास इकट्ठा नहीं होते, शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जाता। हालांकि शव को अपने साथ रखना परिवार के सामर्थ्य और आर्थिक स्थिति पर भी निर्भर करता है। जहाँ जो लोग गरीब होते हैं, वो शव को ज्यादा दिन साथ नहीं रखते और जल्दी ही अंतिम संस्कार कर देते हैं।

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