अगर ऐसा हुआ तो कोई भी व्यक्ति एक निश्चित सीमा से अधिक धनराशि कैश में नहीं रख पाएगा। सूत्रों ने कहा कि विगत में इस संबंध में कई सुझाव आएं हैं। दरअसल, नोटबंदी के बाद जिस तरह बड़ी संख्या में नकदी पकड़ी जा रही है। उसे देखते हुए कैश रखने की सीमा तय करने जरूरत महसूस की जा रही है। सूत्रों ने कहा की नकदी की सीमा तय करने के लिए आयकर कानून 1961 में जरूरी संशोधन किए जा सकते हैं।
इस दिशा मे कदम इसलिए भी जरूरी है क्योंकि तीन साल में आयकर विभाग की छापेमारी में 1500 करोड़ रुपये से अधिक नकदी जब्त हुई है। आठ नवंबर को नोटबंदी के एलान के बाद से 16 दिसंबर तक 316 करोड़ रुपये जब्त किए जा चुके हैं। इससे पता चलता है कि लोगों ने नए नोट जमा करना शुरू कर दिया है। इसलिए जरूरी है कि नकदी रखने की एक सीमा तय की जाए।
पहले भी जब्त होता रहा है भारी भरकम कैश
– 2013-14 में 514.30 करोड़ जमा कैश जमा
– 2014-15 में 518.55 करोड़ जमा कैश जमा
– 2015-16 में 470.89 करोड़ जमा कैश जमा
सीमा से अधिक नेाट जब्त करने का सुझाव
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष सुधीर चंद्र की अध्यक्षता वाली समिति ने भी निजी इस्तेमाल के लिए नकदी रखने की सीमा तय करने की सिफारिश की थी। समिति का कहना था कि एक निश्चित सीमा से अधिक नकदी पाए जाने पर उसे सरकार को जब्त कर लेना चाहिए।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष सुधीर चंद्र की अध्यक्षता वाली समिति ने भी निजी इस्तेमाल के लिए नकदी रखने की सीमा तय करने की सिफारिश की थी। समिति का कहना था कि एक निश्चित सीमा से अधिक नकदी पाए जाने पर उसे सरकार को जब्त कर लेना चाहिए।
सूत्रों की माने तो घर में नकदी की सीमा 15 लाख रुपये तय की जा सकती है। असल में एसआइटी ने जुलाई में वित्त मंत्रालय को सौंपी अपनी पांचवी रिपोर्ट में 15 लाख रुपये से अधिक कैश रखने के लिए आयकर आयुक्त की अनुमति लेनी की सिफारिश की थी। एसआइटी ने अपनी पांचवी रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की थी कि अगर कोई व्यक्ति अपने खाते से तीन लाख रुपये से अधिक निकालता है तो बैंक को इसे संदेहास्पद मानकर फाइनेंशियल इंटेलीजेंस यूनिट और आयकर विभाग को सूचित करना चाहिए।
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