साल 2016: भारत का लोहा माना दुनिया ने - JBP AWAAZ

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Tuesday, 20 December 2016

साल 2016: भारत का लोहा माना दुनिया ने

नई दिल्ली: बात चाहे काले धन से निपटने के लिए नोटबंदी की हो, या फिर नवोन्मेष की हो, अंतरिक्ष के क्षेत्र में अपनी काबिलियत दिखाने की हो या फिर स्वास्थ्य के क्षेत्र में असंभव लगने वाली उपलब्धि हासिल करने की हो, भारत ने पूरे दमखम के साथ अपनी मेधा दिखाई और दुनिया के सामने साबित कर दिया कि वह विषमताओं से जूझते हुए खुद को खरा साबित करने का माद्दा रखता है।

दुनिया को दिखाया भारत का दम
एक अरब से अधिक की आबादी वाले इस देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर की रात को अचानक राष्ट्र के नाम संबोधन में काले धन और भ्रष्टाचार की समस्या पर अंकुश लगाने के लिए 500 रुपए और 1000 रुपए के नोट अमान्य करने का ऐलान किया। दुनिया के कई देशों में मोदी के इस हौसले और फैसले की सराहना की। कभी अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका से जीपीएस (ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम) के लिए मदद मांगने वाले भारत ने अपनी ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत अपना ‘देसी जीपीएस’ तैयार कर दुनिया को दिखा दिया कि ‘हम किसी से कम नहीं हैं।’

जीपीएस प्रणाली वाला पांचवा देश 
आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से 29 अप्रैल को प्रक्षेपित किए गए उपग्रह ‘आईआरएनएसएस-1जी’ के सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित हो जाने के साथ ही भारत अमेरिका, रूस, चीन और यूरोप के बाद विश्व का ऐसा पांचवा देश बन गया, जिसके पास अपनी जीपीएस प्रणाली है। अंतरिक्ष में अपनी सफलता की सुनहरी गाथा लिखने वाला भारत अब अपने आसपास 1500 किलोमीटर के दायरे में आने वाले अन्य देशों को भी इसकी सेवा का लाभ दे सकता है।

भारत बना एक बड़ी ताकत
अंतरिक्ष कार्यक्रम में कीर्तिमान स्थापित करते हुए भारत ने 22 जून को एक ही मिशन में 17 विदेशी और एक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह समेत 20 उपग्रहों का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया और इस महत्वपूर्ण कदम ने अरबों डॉलर के अंतरिक्ष प्रक्षेपण बाजार में भारत को एक बड़ी ताकत बना दिया। प्रक्षेपित किए गए उपग्रहों में से 13 अमेरिका के, 2 उपग्रह कनाडा के और एक-एक जर्मनी तथा इंडोनेशिया के हैं। चेन्नई के सत्यभामा विश्वविद्यालय का शैक्षिक उपग्रह ‘सत्यभामासैट’ तथा पुणे के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग का शैक्षिक उपग्रह ‘स्वयं’ भी इन 20 उपग्रहों में शामिल था।

पोलियो उन्मूलन में ‘अद्भुत सफलता’
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस साल पोलियो उन्मूलन में भारत की ‘अद्भुत सफलता’ को सराहते हुए अंतररराष्ट्रीय मंच पर कहा कि इस सफलता का विस्तार खसरा जैसी दूसरी बीमारियों के उन्मूलन कार्यक्रमों में किया जा सकता है और पाकिस्तान सहित दूसरे देशों में इसे दोहराया जा सकता है। डब्ल्यूएचओ के तकनीकी अधिकारी डॉ मुफ्ती जुबैर वदूद ने पेरिस में विश्व पोलियो दिवस के एक कार्यक्रम में कहा, ‘पाकिस्तान अच्छे से सीख सकता है कि भारत में बीमारी के सबसे संवेदनशील जगहों बिहार और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सूक्ष्म योजना बनाकर एवं क्षेत्र की प्रवासी आबादी से निपटते हुए कैसे इसका खात्मा किया गया।

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